दीन को लेकर बहुत सी बातें मनुष्य में व्याप्त हैं.
जा इन्सान ने इस ज़मीन पर पर रखा तो उसके सामने जानवर, मौसम और अपने जैसे इन्सान से ख़तरा था.
जानवर से बचने के लिए उसने हथियार बनाये और मकान बनाये.
मौसम के खतरों से बचने के लिए उसने मकान, पंखे, कूलर और ac बनाये.
इंसान से खतरे से बचने के लिए इंसान ने कबीला. राजा और प्रजातंत्र का निर्माण किया.
एक समस्या यह थी कि आदमी मरना नहीं चाहता. इसके लिए उसने मरने के बाद की ज़िन्दगी पर विचार किया और धर्म का उदय हुआ.
सांप, नेवला, हाथी, बादल, पूर्वज, हवा, सूरज, असमान और सातवें सामान पर बैठा अपने जैसे खुदा का अविष्कार किया.
अपने अमल की गलती के लिए किस्मत, शैतान, अल्लाह, नफस इत्यादि को ज़िम्मेदार ठहराया.
कब नाराज़ हुआ.
आदमी को अपने मरने के बाद का मालूम न होने की वजह से उसने अनदेखे खुदा पर यकीन किया और मरने के बाद की ज़िन्दगी को ठीक करने के लिए खुदा को खुश करने का घनघोर प्रयास किया. और यह मालूम नहीं कि वोह कब खुश हुआ और कब नाराज़ हुआ.
खुदाई को हैंडल करने के लिए समाज में एक टोला तैयार हुआ जिसे मुल्ला, पुरोहित वगरह के नाम से जानते हैं.
यह टोला बहुत चालक होता है यह सरकार, सरमायादार और बदमाशों से साठ गाँठ करके अपने उल्लू सीधा करता है.
यह आमतौर से हरामखोर टाइप का ग्रुप होता है जो धर्म की शिक्षा का सौदा करता है.

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